तुम्हारी कमी आज भी कमी रह गई, जिंदगी अधूरी कि अधूरी रह गई, बरसात में भींगे पत्तो कि तरह , आँखों में कुछ नमी रह गई, न आओगे इसका इत्मीनान है हमे, फिर भी दिल के कोने में तुम्हारी चाहत रह गई...
सादगी की जीती जागती सूरत हो तुम, कभी न देखा हो ऐसी मूरत हो तुम , कच्चे मिटटी से बनी निर्मल काया हो तुम, कुछ मीठे एहसासों से बनी रिश्तो की गठरी हो तुम , ये आज मुझे क्या हो गया मैं क्यों हो गया गुम, दूरियों का मज़ा भी नजदीकिया सी लगती है, कुछ प्यारे अनछुए पलो की सी एहसास हो तुम,